Sunday, 16 September 2018

Ganesh ustav

मिरवनुकित  "बाई  जरा  जपुन  दांडा  धर " वर  लोकांना  ताल  धरताना आज  पहिलाय .
होय आज  मी  चतुर्थिला  माझा गणरायाला रडताना  पाहीलय.

तो  भाव  ती  भक्ती  आज  विसरताना  पाहीलय
मूर्तितला  देव  शोधताना  रांगेत  भ्रष्टाचार  करताना  मी  भक्तांना  पहिलय
होय आज  मी  चतुर्थिला  माझा गणरायाला रडताना  पाहीलय.

निर्मल  मन  आणी  विद्येची  देवता  म्हणुन  ज्याला  मी  पूजताना  पहिलय .
त्याच   मांडपात  पत्त्यांचा  डाव  आज  मी  मांडताना  पहिलय .
होय आज  मी  चतुर्थिला  माझा गणरायाला रडताना  पाहीलय.

प्रसादाचा  मोदक  आणी  दहीचा  न्यवैदय  आशिर्वाद  ग्रहन  करताना  पहिलय.
त्याच  गणरायाच्या   मिरवनुकित  नाचताना  दारू  वास  आजकल  घूटमलताना  पहिलय.
होय आज  मी  चतुर्थिला  माझा गणरायाला रडताना  पाहीलय.

भक्ती  गीते  आणी  मंगलमय  वातावर्णात  कधी  मी  भक्त  आणी  कार्य करत्यांना  आनंदाने  न्हाहताना  पहिलय .
आज  भक्तांची  गर्दी , कार्यकरतयांची  बेशिस्ती  आणी  अंधश्रद्धे  बाजार  मांडातानं  पहिलय .
होय आज  मी  चतुर्थिला  माझा गणरायाला रडताना  पाहीलय.

- Yogen Desai